
देवघर | SNTV24X7 डेस्क
महाशिवरात्रि से ठीक दो दिन पहले झारखंड के देवघर स्थित प्रसिद्ध Baidyanath Dham में सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई। बाबा बैद्यनाथ मंदिर और मां पार्वती मंदिर के शिखर पर स्थापित पवित्र पंचशूल को आज विधि-विधान के साथ उतारा गया।
हर साल यह रस्म महाशिवरात्रि से पहले एक बार ही होती है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटते हैं।

⚡ क्या है पंचशूल और क्यों है खास?
आम तौर पर शिव मंदिरों में त्रिशूल दिखता है, लेकिन देवघर में पंचशूल स्थापित है
पंचशूल में पाँच शूल होते हैं
इसे पंच तत्व — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतीक माना जाता है
धार्मिक मान्यता: यह नकारात्मक शक्तियों और पापों का नाश करता है
👉 यही कारण है कि बैद्यनाथ धाम का यह स्वरूप देश के अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग पहचान रखता है।
🛕 कैसे होती है पंचशूल उतारने की रस्म?
तय तिथि पर पुजारी शिखर पर चढ़कर मंत्रोच्चार के साथ पंचशूल उतारते हैं
विशेष पूजन और शुद्धिकरण किया जाता है
कुछ समय के लिए इसे श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु रखा जाता है
महाशिवरात्रि के दिन पुनः पूजन के बाद शिखर पर स्थापित किया जाता है
यह पूरी प्रक्रिया बेहद अनुशासन और परंपरागत नियमों के तहत होती है।

🕉️ धार्मिक मान्यता क्या कहती है?
धार्मिक विश्वास है कि पंचशूल का स्पर्श और दर्शन मनोकामनाएँ पूर्ण करता है और जीवन के कष्टों को कम करता है। कई श्रद्धालु इसे सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं।
📌 महाशिवरात्रि पर बढ़ेगी भीड़
Maha Shivaratri के अवसर पर देवघर में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम किए हैं।
देवघर की यह परंपरा सिर्फ धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और स्थानीय संस्कृति का जीवंत संगम है। बदलते दौर में भी ऐसी परंपराओं का जीवित रहना भारत की आध्यात्मिक विरासत की ताकत दिखाता है।


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